लोकपाल

   
     17 मार्च 2019 को लोकपाल और लोकायुक्त एक्ट 2013 के अंतर्गत भारत को सर्वोच्च न्यायालय के रिटायर्ड न्यायाधीश पिनाकी चन्द्र घोस के रूप मै प्रथम लोकपाल मिले।   

लोकपाल क्या है ?

  लोकपाल शब्द संस्कृत के लोक + पाल से बना है, जिसमे लोक का   मतलब लोगो से तथा पाल का मतलब रक्षा करने वाला से है.

 

लोकापाल का इतिहास

   लोकपाल का विचार सबसे पहले स्वीडन गवर्नमेंट में 1809 में Ombudsman के नाम से जनता के अधिकारों को बचाने के लिए जो की एक अलग अंग के रूप में कार्य करे  द्वारा अपनाया गया.

भारत में इसका विचार या कहे की इसे अपनाने के लिए सबसे पहले 1963 में लक्ष्मी माल सिंघी ने दिया और 


  • 1966 में ARC ( Administrative Reforms Commission {प्रशासनिक सुधार आयोग}) जिसके मुखिया मोरारजी देशाई जी थे ने redressal of citizen's grievances की एक रिपोर्ट में इसका जिक्र किया। 
   




  • 1968 - लोकपाल बिल को संसद में लाया लाया गया, लेकिन पास नहीं हुआ 





  • 2002 - एक बार फिर मांग उठी और लोकायुक्त (राज्य स्तर ) और प्रधानमंत्री को इससे स्वतंत्र रखने की सिफारिश  की गयी। 








  • 2011 - चर्चा हुई 









  • 2013 - आखिरकार लोकपाल और लोकायुक्त एक्ट 2013 बिल संसद 
    में पास होकर एक्ट बना।

 

 

 

 

लोकपाल और लोकायुक्त का चुनाव या अपॉइंट 

  लोकपाल और लोकायुक्त का चुनाव 5 सदस्यी कमिटी द्वारा किया जाता है जिसकी हेड प्रधानमंत्री होते है -

1. भारत के प्रधानमंत्री 

2. लोकसभा अध्यक्ष 

3. सर्वोच्च न्यायालय के जज 

4. विपक्ष के लीडर 

5. राष्ट्रपति द्वारा नामित प्रख्यात विधिवेत्ता (eminent jurist) 

 

लोकपाल के  सदस्य

  लोकपाल में कुल सदस्यो की संख्या 8 है, जिसमे SC काम से काम 4 सदस्य होंगे और अन्य 4 अलग अलग विभागों में Anti -curruption के जांच से सम्बंधित अनुभव हो। 

कार्यकाल 

  इनका कार्यकाल 5 साल का होगा और अधिकतम 70 साल की उम्र तक। 

प्रधानमंत्री और लोकपकपाल  

  वैसे तो प्रधानमंत्री इसके दायरे में अते है लेकिन कुछ चीजों में इनसे   पूछताछ या कहे की लोकपाल के दायरे से बाहर आते है जैसे अंतरास्ट्रीय संबंध , बहरी और आंतरिक सुरक्षा सार्वजनिक वयवस्था , एटॉमिक ऊर्जा और स्पेस से जुड़े मामलो में।